केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने कहा है कि यदि भारत के कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदला जाए तो यह ₹5 लाख करोड़ का बड़ा उद्योग बन सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार गडकरी ने कचरा प्रबंधन, बायो-एनर्जी, रीसाइक्लिंग और वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल को देश की भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे बड़े और तेजी से शहरीकरण वाले देश में ठोस कचरा प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। हर दिन लाखों टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसका बड़ा हिस्सा लैंडफिल साइटों में जमा हो जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक गडकरी लंबे समय से “वेस्ट टू वेल्थ” मॉडल को बढ़ावा देते रहे हैं, जिसमें जैविक कचरे से बायोगैस, प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण सामग्री, सीवेज से ऊर्जा और अन्य अपशिष्टों से उपयोगी उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से कचरे को ईंधन, ऊर्जा, खाद, निर्माण सामग्री और औद्योगिक उत्पादों में बदला जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण कम होगा बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में कई शहर अब बायो-माइनिंग, वेस्ट प्रोसेसिंग और कचरा आधारित ऊर्जा परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े स्तर पर वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन लागू किया जाए तो यह शहरी अर्थव्यवस्था और हरित उद्योगों के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन, सर्कुलर इकॉनमी और सतत विकास लक्ष्यों के तहत कचरा प्रबंधन सुधारों पर जोर देती रही है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि ₹5 लाख करोड़ का संभावित “वेस्ट इकॉनमी” क्षेत्र निवेश, स्टार्टअप, हरित तकनीक और रोजगार के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। गडकरी का बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ विकास और हरित ऊर्जा को लेकर नीतिगत फोकस तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कचरे को संसाधन में बदलना भविष्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-17 19:07:25