भारत का अन्य 10 BRICS देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार कैलेंडर वर्ष 2025 में 416 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच यह व्यापार लगभग 10 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि BRICS समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से उभरते देशों का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है और भारत की इसमें रणनीतिक तथा आर्थिक भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। BRICS में भारत के अलावा Brazil, Russia, China, South Africa समेत नए सदस्य देश भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, रक्षा, विनिर्माण और डिजिटल सेवाएं भारत-BRICS व्यापार वृद्धि के प्रमुख क्षेत्र रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक बदलावों के बीच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। भारत विशेष रूप से ऊर्जा आयात, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाओं और औद्योगिक निर्यात के माध्यम से BRICS देशों के साथ अपने आर्थिक संबंध मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन भारत का सबसे बड़ा BRICS व्यापार साझेदार बना हुआ है, जबकि रूस के साथ ऊर्जा व्यापार में भी हाल के वर्षों में बड़ी वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS देशों के बीच बढ़ता व्यापार वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। हाल के वर्षों में BRICS मंच स्थानीय मुद्रा व्यापार, वैकल्पिक वित्तीय ढांचे और वैश्विक दक्षिण देशों के सहयोग पर भी जोर देता रहा है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार भारत के लिए BRICS व्यापार केवल निर्यात और आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी से भी जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आने वाले वर्षों में भारत और BRICS देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि 416 अरब डॉलर का व्यापार आंकड़ा भारत की वैश्विक आर्थिक उपस्थिति और बहुपक्षीय व्यापार रणनीति की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-17 19:05:43