Caspar Veldkamp ने कहा है कि सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत का उभरना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत और लचीला बनाने में मदद कर सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में चिप उत्पादन, तकनीकी आत्मनिर्भरता और आपूर्ति सुरक्षा को लेकर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड-19 महामारी और वैश्विक चिप संकट के बाद कई देशों ने सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने पर जोर देना शुरू किया। ऑटोमोबाइल, स्मार्टफोन, रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और औद्योगिक तकनीकों सहित लगभग हर आधुनिक उद्योग सेमीकंडक्टर पर निर्भर है। ऐसे में वैश्विक उत्पादन का सीमित क्षेत्रों में केंद्रित होना कई देशों के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बना।
India हाल के वर्षों में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़े निवेश और नीतिगत प्रोत्साहन पर काम कर रहा है। सरकार ने चिप निर्माण, पैकेजिंग और डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। विश्लेषकों का कहना है कि भारत अपनी बड़ी इंजीनियरिंग प्रतिभा, डिजिटल बाजार और बढ़ती औद्योगिक क्षमता के कारण वैश्विक तकनीकी कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है।
Netherlands वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेष रूप से उन्नत चिप निर्माण उपकरण और लिथोग्राफी तकनीक के क्षेत्र में। डच कंपनी ASML को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर उपकरण कंपनियों में गिना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और नीदरलैंड के बीच तकनीकी सहयोग भविष्य में और बढ़ सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक शक्तियां अब “विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला” मॉडल पर अधिक ध्यान दे रही हैं। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है। भारत, अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों के बीच तकनीकी सहयोग को इसी व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सेमीकंडक्टर उद्योग अत्यधिक पूंजी-गहन और तकनीकी रूप से जटिल होता है। किसी नए देश को वैश्विक स्तर का विनिर्माण केंद्र बनने के लिए बिजली, जल, कुशल श्रम और दीर्घकालिक नीति स्थिरता जैसे क्षेत्रों में निरंतर निवेश की आवश्यकता होती है।
सोशल मीडिया और उद्योग जगत में डच विदेश मंत्री के बयान को भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक महत्व के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कई विश्लेषकों ने इसे भारत की उभरती तकनीकी रणनीति के समर्थन के रूप में भी देखा।
फिलहाल भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक तकनीकी साझेदारियों पर अंतरराष्ट्रीय उद्योग जगत की नजर बनी हुई है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-17 19:04:15