दिल्ली सरकार ने राजधानी के बड़े कचरा पहाड़ों को खत्म करने की दिशा में बड़ा लक्ष्य तय किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार ने घोषणा की है कि इस वर्ष भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइटों को पूरी तरह समतल करने का प्रयास किया जाएगा, जबकि गाजीपुर लैंडफिल साइट को 2027 के अंत तक साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली के ये विशाल कचरा पहाड़ लंबे समय से पर्यावरण, स्वास्थ्य और शहरी प्रबंधन की गंभीर चुनौती बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन लैंडफिल साइटों से निकलने वाली जहरीली गैसें, आग लगने की घटनाएं और भूजल प्रदूषण आसपास के इलाकों के लिए बड़ी चिंता का विषय रहे हैं। दिल्ली सरकार और नगर निकाय पिछले कुछ वर्षों से बायो-माइनिंग और कचरा प्रसंस्करण तकनीकों के माध्यम से इन साइटों को कम करने पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी में प्रतिदिन हजारों टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसके कारण पुराने लैंडफिल स्थलों पर भारी दबाव बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार अब कचरा प्रबंधन, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निपटान प्रणाली को अधिक मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भलस्वा, ओखला और गाजीपुर जैसे बड़े कचरा पहाड़ खत्म होते हैं तो इससे वायु गुणवत्ता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हाल के वर्षों में गाजीपुर लैंडफिल को “कचरे का पहाड़” कहकर भी व्यापक चर्चा मिली थी, क्योंकि इसकी ऊंचाई कई बहुमंजिला इमारतों के बराबर पहुंच चुकी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक नई तकनीकों और मशीनरी के जरिए पुराने कचरे को अलग कर पुनर्चक्रण और ऊर्जा उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में टिकाऊ कचरा प्रबंधन भविष्य की सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौतियों में से एक रहेगा। फिलहाल सरकार के नए लक्ष्य को राजधानी की सफाई और पर्यावरण सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-17 19:05:00