भारत ने कथित तौर पर “मिशन सुदर्शन चक्र” नामक बहु-स्तरीय राष्ट्रीय मिसाइल रक्षा प्रणाली को 2030 से 2040 के बीच चरणबद्ध तरीके से तैनात करने की योजना की पुष्टि की है। रिपोर्टों के अनुसार, रक्षा सचिव Rajesh Kumar Singh ने इस कार्यक्रम को लेकर जानकारी साझा की। इस परियोजना को भारत की दीर्घकालिक वायु एवं मिसाइल रक्षा रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, “मिशन सुदर्शन चक्र” का उद्देश्य ड्रोन, क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और भविष्य के उन्नत हवाई खतरों के खिलाफ बहु-स्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार करना है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस नेटवर्क में S-400, Akash, Project Kusha, XRSAM और Defence Research and Development Organisation की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों को एकीकृत करने की योजना है।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में बहु-स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली अत्यधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। हाल के वर्षों में ड्रोन युद्ध, हाइपरसोनिक हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइल तकनीकों के विस्तार ने कई देशों को उन्नत रक्षा नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रेरित किया है। भारत भी अपनी प्रमुख सैन्य और रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए व्यापक रक्षा कवच विकसित करने पर काम कर रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना में एक्सो-एटमॉस्फेरिक और एंडो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्टर तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसका अर्थ है कि आने वाली मिसाइलों को वायुमंडल के बाहर और भीतर दोनों स्तरों पर रोकने की क्षमता विकसित की जा सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की प्रणाली के लिए अत्याधुनिक रडार, रियल-टाइम कमांड नेटवर्क और तेज प्रतिक्रिया क्षमता आवश्यक होती है।
Defence Research and Development Organisation लंबे समय से PAD, AAD, AD-1 और AD-2 जैसी इंटरसेप्टर तकनीकों पर काम कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इन कार्यक्रमों ने भारत की स्वदेशी मिसाइल रक्षा क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भविष्य में हाइपरसोनिक रक्षा और निर्देशित ऊर्जा हथियारों को भी इस नेटवर्क में शामिल करने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े राष्ट्रीय रक्षा नेटवर्क को विकसित करना तकनीकी, वित्तीय और परिचालन दृष्टि से अत्यंत जटिल होता है। बहु-स्तरीय समन्वय, निरंतर परीक्षण और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दे इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
फिलहाल “मिशन सुदर्शन चक्र” को भारत की भविष्य की वायु एवं मिसाइल रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-16 23:52:48