भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की एक टिप्पणी को लेकर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि “कुछ युवा कॉकरोच की तरह हैं जिन्हें रोजगार नहीं मिलता, उनमें से कुछ मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर सभी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।” इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया, कानूनी समुदाय और विभिन्न सामाजिक समूहों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में RTI कार्यकर्ता और मीडिया संस्थान लंबे समय से पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ लोगों ने CJI की टिप्पणी को व्यवस्था के दुरुपयोग करने वाले तत्वों पर कटाक्ष बताया है, जबकि कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी आवाजों ने इसे मीडिया और RTI समुदाय के प्रति कठोर एवं आपत्तिजनक टिप्पणी करार दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायपालिका से जुड़े वरिष्ठ पदों पर बैठे व्यक्तियों के सार्वजनिक बयान अक्सर व्यापक चर्चा और संवेदनशील प्रतिक्रिया का विषय बन जाते हैं। भारत में सूचना का अधिकार कानून यानी RTI Act को पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही के महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा जाता है। वहीं मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। विश्लेषकों के अनुसार इस बयान ने बेरोजगारी, युवा अवसर, मीडिया की भूमिका और सार्वजनिक विमर्श की भाषा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर बयान के समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं तेजी से वायरल हो रही हैं। कई लोगों का कहना है कि संस्थागत आलोचना और जवाबदेही लोकतंत्र का आवश्यक हिस्सा है, जबकि कुछ लोग फर्जी एक्टिविज्म और सनसनीखेज मीडिया व्यवहार पर भी सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल इस बयान को लेकर कानूनी और राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-05-16 18:29:25