भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO अगली पीढ़ी के रॉकेट कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए रूस के साथ सेमी-क्रायोजेनिक इंजनों की खरीद और तकनीकी सहयोग पर बातचीत आगे बढ़ा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर पर विस्तृत चर्चाएं जारी हैं, जिनका उद्देश्य भारत की भारी प्रक्षेपण क्षमता और उन्नत अंतरिक्ष मिशनों को नई मजबूती देना है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेमी-क्रायोजेनिक इंजन आधुनिक रॉकेट तकनीक का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं, क्योंकि वे अधिक दक्षता, उच्च थ्रस्ट और बेहतर पेलोड क्षमता प्रदान करते हैं। भारत लंबे समय से अपने लॉन्च वाहनों की क्षमता बढ़ाने और भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों, भारी उपग्रह प्रक्षेपण तथा गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए नई तकनीकों पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ISRO पहले से ही स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक इंजन विकास कार्यक्रम पर कार्य कर रहा है, लेकिन रूस के साथ सहयोग तकनीकी प्रगति और समयसीमा को तेज करने में मदद कर सकता है। अंतरिक्ष विशेषज्ञों का कहना है कि रूस के पास क्रायोजेनिक और सेमी-क्रायोजेनिक प्रणोदन तकनीक में लंबा अनुभव है और भारत-रूस अंतरिक्ष सहयोग कई दशकों पुराना रहा है। हाल के वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और उन्नत प्रक्षेपण क्षमताओं पर विशेष जोर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य के भारी रॉकेट और पुन: प्रयोज्य लॉन्च सिस्टम के लिए अधिक शक्तिशाली इंजनों की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सहयोग केवल इंजन खरीद तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि तकनीकी हस्तांतरण, परीक्षण और संयुक्त विकास जैसे पहलुओं पर भी चर्चा हो सकती है। अंतरिक्ष विश्लेषकों का मानना है कि उन्नत इंजन तकनीक हासिल करने से भारत की वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में स्थिति और मजबूत हो सकती है। ISRO आने वाले वर्षों में बड़े उपग्रह प्रक्षेपण, अंतरिक्ष स्टेशन कार्यक्रम और मानव अंतरिक्ष मिशनों पर भी फोकस कर रहा है। ऐसे में सेमी-क्रायोजेनिक इंजन कार्यक्रम को भारत की भविष्य की अंतरिक्ष रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-16 18:31:35