प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार Sanjeev Sanyal के एक बयान ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार संजीव सान्याल ने कहा कि केवल नौकरी की स्थिरता पाने के उद्देश्य से UPSC जैसी परीक्षाओं की तैयारी करना “पूरी तरह समय की बर्बादी” हो सकता है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया, शिक्षा जगत और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में UPSC परीक्षा लंबे समय से प्रतिष्ठित और सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर वर्ष लाखों छात्र सिविल सेवा में करियर बनाने के लिए कई वर्षों तक तैयारी करते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक संजीव सान्याल का तर्क था कि आज की तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था में युवाओं को केवल सुरक्षित सरकारी नौकरी के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता, तकनीक और निजी क्षेत्र के अवसरों की ओर भी देखना चाहिए। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार संरचना में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है, जहां स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था और निजी क्षेत्र तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि कई शिक्षा विशेषज्ञों और छात्रों का मानना है कि UPSC केवल नौकरी का माध्यम नहीं बल्कि सार्वजनिक सेवा, प्रशासनिक जिम्मेदारी और सामाजिक बदलाव का अवसर भी माना जाता है। सोशल मीडिया पर सान्याल के बयान को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे बदलती आर्थिक वास्तविकताओं का व्यावहारिक दृष्टिकोण बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे सिविल सेवा की भूमिका को कमतर आंकने वाला बयान मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सरकारी नौकरियों को सामाजिक सुरक्षा, स्थिर आय और प्रतिष्ठा के कारण अभी भी अत्यधिक महत्व दिया जाता है। वहीं निजी क्षेत्र में तेजी से बदलते अवसर युवाओं के करियर विकल्पों को विविध बना रहे हैं। संजीव सान्याल का यह बयान भारत में करियर, शिक्षा और रोजगार प्राथमिकताओं को लेकर चल रही व्यापक बहस को फिर से केंद्र में ले आया है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-16 02:13:38