तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से कपास पर लगाए गए 11 प्रतिशत आयात शुल्क को हटाने की मांग की है। रिपोर्ट्स के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि कपड़ा और वस्त्र उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने तथा उत्पादन लागत कम करने के लिए आयात शुल्क में राहत आवश्यक है। तमिलनाडु भारत के प्रमुख टेक्सटाइल और गारमेंट उत्पादन केंद्रों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में सूती धागा, वस्त्र और परिधान उद्योग संचालित होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे कपास की कीमतों में वृद्धि और आयात शुल्क के कारण उद्योग की लागत बढ़ रही है, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र में कहा कि राज्य का वस्त्र उद्योग लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनाए रखने के लिए सस्ती कच्ची सामग्री उपलब्ध होना जरूरी है। उद्योग संगठनों का कहना है कि कपास पर आयात शुल्क हटाने से घरेलू मिलों को राहत मिल सकती है और उत्पादन लागत कम होने से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि कुछ कृषि और किसान संगठनों का मानना है कि आयात शुल्क हटाने से घरेलू कपास उत्पादकों पर दबाव बढ़ सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार सरकार को उद्योग और किसानों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाना होगा। हाल के वर्षों में भारत का टेक्सटाइल और गारमेंट क्षेत्र वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। केंद्र सरकार भी निर्यात बढ़ाने और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार तमिलनाडु सरकार ने तर्क दिया है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कच्चे माल की लागत को देखते हुए उद्योग को राहत देना आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आयात शुल्क में बदलाव होता है तो इसका असर टेक्सटाइल उद्योग, कपास बाजार और निर्यात क्षेत्र पर व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है। फिलहाल उद्योग जगत और व्यापार संगठनों की नजर केंद्र सरकार के संभावित निर्णय पर बनी हुई है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-15 16:38:21