भारत ने वैश्विक स्तर पर कुल वन क्षेत्र के मामले में 9वां स्थान हासिल किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश का कुल वन और वृक्ष आवरण अब भौगोलिक क्षेत्रफल के 25.17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण अभियानों और हरित क्षेत्र विस्तार की दिशा में किए गए प्रयासों का महत्वपूर्ण परिणाम मानी जा रही है। भारत लंबे समय से वन संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वन और वृक्ष आवरण में वृद्धि से कार्बन अवशोषण क्षमता बढ़ाने, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के बीच हरित क्षेत्र बनाए रखना किसी भी देश के लिए बड़ी चुनौती होता है। भारत में केंद्र और राज्य सरकारें वृक्षारोपण अभियान, सामुदायिक वन प्रबंधन और वन संरक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार देश के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाए गए हैं, जिनका असर वन और वृक्ष आवरण के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वन क्षेत्र में वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव जल संरक्षण, जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों के तहत भी कार्बन सिंक क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। पर्यावरण विश्लेषकों का कहना है कि वन क्षेत्र में वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जैव विविधता और पारिस्थितिक गुणवत्ता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार वन संरक्षण कानूनों और हरित परियोजनाओं को मजबूत करने पर भी काम कर रही है। वैश्विक वन क्षेत्र रैंकिंग में भारत का 9वें स्थान पर पहुंचना पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है और इसे सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-16 02:07:10