हैदराबाद आधारित स्पेस-टेक स्टार्टअप स्कायरूट एयरोस्पेस ने 60 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाकर भारत की पहली स्पेस-टेक यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त कर लिया। जीआईसी प्राइवेट लिमिटेड और शेरपालो वेंचर्स के नेतृत्व में हुई इस फंडिंग राउंड ने कंपनी के मूल्यांकन को 1.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचा दिया। ब्लैकरॉक प्रबंधित फंड्स ने भी इसमें भाग लिया। कंपनी ने अब तक कुल 160 मिलियन डॉलर का पूंजी जुटाई है। स्कायरूट ने विक्रम-एस रॉकेट का सफल प्रारंभिक परीक्षण किया था। यह भारत का पहला निजी लॉन्च वाहन था। कंपनी छोटे उपग्रहों के लिए कम लागत वाले लॉन्च सेवाएं प्रदान करती। इसरो के साथ सहयोग कर रही। स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन विकसित कर रही। 2027 तक व्यावसायिक उड़ानें शुरू करने का लक्ष्य। स्टार्टअप ने 2019 में प्रारंभ किया। पंगेश सोमाणी और नितीन श्रीवास्तव ने स्थापित किया। हैदराबाद में इंजीनियरिंग और विनिर्माण केंद्र। राकेट डिजाइन, परीक्षण, लॉन्च सेवाएं। छोटे उपग्रहों के लिए समर्पित। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ रही। इसरो ने 2020 में नीतिगत सुधार किए। निजी कंपनियों को प्रोत्साहन। स्कायरूट ने अग्निबाण रॉकेट का परीक्षण किया। ध्रुवा स्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस अन्य प्रमुख स्टार्टअप। स्कायरूट ने 100 किलो पेलोड क्षमता वाला विक्रम-1 रॉकेट विकसित किया। सुपर डेंसिटी सॉलिड बूस्टर। कार्बन कम्पोजिट मोटर केस। 3डी प्रिंटिंग तकनीक। भारत को लॉन्च ऑन डिमांड क्षमता। छोटे उपग्रहों का बढ़ता बाजार। स्कायरूट ने सैन्य, पृथ्वी अवलोकन, संचार उपग्रहों के लिए सेवा। यूनिकॉर्न दर्जा स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। निवेशकों का विश्वास। अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा। भारत वैश्विक स्पेस मार्केट में प्रतिस्पर्धी बनेगा। स्कायरूट का सफलता मील का पत्थर।
by Dainikshamtak on | 2026-05-07 15:06:24