भारत और European Union ने इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए 15.2 मिलियन यूरो यानी लगभग 169 करोड़ रुपये की संयुक्त परियोजना शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में बढ़ती बैटरी मांग के बीच टिकाऊ सप्लाई चेन तैयार करना और महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति क्षमता बढ़ाना है।
यह परियोजना ऐसे समय में शुरू की गई है जब भारत तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार की विभिन्न योजनाओं और ऑटोमोबाइल कंपनियों के निवेश के कारण आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों के प्रबंधन की चुनौती सामने आने वाली है। नई भारत-ईयू साझेदारी इसी चुनौती को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
परियोजना के तहत बैटरियों से निकलने वाले लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और अन्य महत्वपूर्ण धातुओं को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से पुनः उपयोग में लाने पर काम किया जाएगा। इसके अलावा रिसाइक्लिंग तकनीक, अनुसंधान सहयोग, औद्योगिक क्षमता निर्माण और पर्यावरणीय मानकों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के साथ बैटरी कचरे का मुद्दा वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। बैटरियों में उपयोग होने वाले कई खनिज सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और उनका आयात कई देशों के लिए रणनीतिक चुनौती बना हुआ है। ऐसे में बैटरी रिसाइक्लिंग को भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ तकनीक के लिए अहम माना जा रहा है।
भारत ने हाल के वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा, हरित परिवहन और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य तय किए हैं। दूसरी ओर, European Union भी सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन टेक्नोलॉजी को लेकर कई दीर्घकालिक नीतियों पर काम कर रहा है। नई साझेदारी को दोनों पक्षों के बीच हरित प्रौद्योगिकी सहयोग के महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना में अनुसंधान संस्थानों, उद्योग भागीदारों और नीति विशेषज्ञों की भागीदारी भी शामिल होगी। इसका उद्देश्य केवल बैटरियों का पुनर्चक्रण नहीं बल्कि एक ऐसा मॉडल विकसित करना है जिसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि परियोजना सफल रहती है तो इससे भारत में बैटरी निर्माण और रिसाइक्लिंग उद्योग को नई गति मिल सकती है। साथ ही यह इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र की दीर्घकालिक लागत और आयात निर्भरता कम करने में भी मददगार साबित हो सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-07 14:53:04