मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की व्यवहार्यता जांचने के लिए 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग के आदेश के अनुसार समिति को 60 दिनों के भीतर UCC का मसौदा और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर गठित यह समिति इस वर्ष दिवाली तक UCC लागू करने का लक्ष्य रखेगी। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज रंजना देसाई इसकी अध्यक्षता करेंगी। सदस्यों में पूर्व IAS शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और समाजसेवी बुधपाल सिंह शामिल हैं।
समिति विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों से जुड़े मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन करेगी। उत्तराखंड, गुजरात जैसे राज्यों के मॉडल का विश्लेषण करेगी। जनता, धार्मिक-सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव लेगी। सुनवाई और परामर्श बैठकें आयोजित करेगी। महिलाओं व बच्चों के अधिकारों की रक्षा के प्रावधान सुझाएगी। प्रशासनिक, कार्यान्वयन पहलुओं की जांच कर भविष्य की जटिलताएं रोकेगी। राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक कारकों को ध्यान में रखेगी। उत्तराखंड और गुजरात के बाद एमपी तीसरा राज्य होगा जो UCC लागू करने की दिशा में कदम उठा रहा। भाजपा सरकार समान कानून से लिंग समानता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का दावा कर रही। विपक्ष ने जन सुनवाई पर जोर दिया। समिति का गठन विवादास्पद रहा। मुस्लिम संगठनों ने विरोध जताया। सरकार ने इसे समावेशी बताया। मसौदा कैबिनेट में पेश होगा। विधानसभा सत्र में विधेयक लाया जा सकता है। यह कदम संवैधानिक दायरे 44 को साकार करने का प्रयास।
by Dainikshamtak on | 2026-04-29 18:15:14