मध्य प्रदेश विधानसभा ने 27 अप्रैल को विशेष सत्र में विधायी निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के लिए सरकारी प्रस्ताव पारित किया। यह निर्णय परिसीमन के बाद लागू होगा। एकदिवसीय सत्र में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बहस का जवाब देते हुए कांग्रेस पर महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दशकों सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को राजनीतिक स्थान देने से इनकार किया। प्रस्ताव ध्वनिगत मत से पारित हुआ। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत यह आरक्षण लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाओं में लागू होगा। वर्तमान में 230 सदस्यीय एमपी विधानसभा में 27 महिलाएं हैं। परिसीमन के बाद सीटें 345 हो जाएंगी जिनमें 114 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह बदलाव 2028 विधानसभा चुनाव से पहले प्रभावी हो सकता है। इससे कैबिनेट संरचना और निर्वाचन क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ेगा। कांग्रेस नेता उमंग सिंहार ने तत्काल लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में ही देरी का प्रावधान है। सत्र 'नारी शक्ति वंदन' के नाम से बुलाया गया था। भाजपा ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया। विपक्ष ने राजनीतिक नाटक का आरोप लगाया। यह प्रस्ताव संवैधानिक संशोधन से जुड़ा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को मंजूरी दी। इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35% आरक्षण भी बढ़ाया। यह कदम महिलाओं के उत्थान का हिस्सा है। सत्र में बहस दिनभर चली। वॉकआउट के बाद प्रस्ताव आसानी से पारित हुआ। यह निर्णय राज्य की राजनीति को नया रूप देगा।
by Dainikshamtak on | 2026-04-28 15:54:44