नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हिंदी सिनेमा में नस्लवाद पर उठाया सवाल, कहा स्मिता पाटिल सबसे खूबसूरत

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हिंदी सिनेमा में नस्लवाद पर उठाया सवाल, कहा स्मिता पाटिल सबसे खूबसूरत

अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हाल ही में हिंदी सिनेमा में नस्लवाद और सौंदर्य मानकों पर खुलकर बात की। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में नेपोटिज्म से भी बड़ा रेसिज्म का मुद्दा है। गहरे रंग की अभिनेत्रियों को हीरोइन का रोल मिलना दुर्लभ है। उन्होंने दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल को सबसे खूबसूरत बताया। नवाजुद्दीन ने कहा कि स्मिता पाटिल जैसी अभिनेत्री ने अपनी प्रतिभा से सिनेमा में जगह बनाई। उनकी सुंदरता पारंपरिक सौंदर्य मानकों से परे थी। सिद्दीकी ने स्वीकार किया कि खुद भी रंग और कद के कारण शुरुआती करियर में संघर्ष किया। सुधीर मिश्रा की फिल्म सीरियस मेन में इंदिरा तिवारी को हीरोइन बनाए जाने की सराहना की। लेकिन बड़े निर्माताओं की मानसिकता पर सवाल उठाए। हिंदी सिनेमा में गोरे रंग को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। स्मिता पाटिल 1970-80 के दशक की प्रमुख अभिनेत्री थीं। चर्मर, अर्थ, मंडी जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उनकी मृत्यु के बाद भी वे प्रेरणा स्रोत बनी रहीं। याहू ने उन्हें हिंदी सिनेमा की 10 सबसे प्रतिष्ठित सुंदरियों में शामिल किया। नवाजुद्दीन का बयान सिनेमा में विविधता की बहस को ताजगी देता है। वे स्वाभाविक अभिनय के लिए जाने जाते हैं। गैंग्स ऑफ वासेपुर, बाबूमोशाय बैंदीर मस्ते से प्रसिद्धि पाई। सिद्दीकी ने कहा कि सच्ची सुंदरता अभिनय और व्यक्तित्व में होती है। इंडस्ट्री को रंगभेदी सोच छोड़नी चाहिए। स्मिता पाटिल का उदाहरण दिया कि प्रतिभा अंततः जीतती है। उनका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। युवा अभिनेता इसे समर्थन दे रहे हैं। सिनेमा में बदलाव की मांग तेज हो रही है। नवाजुद्दीन की यह टिप्पणी सकारात्मक बहस को बढ़ावा देगी।


by Dainikshamtak on | 2026-04-28 15:49:57

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