आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को वैश्विक शहर बनाने का संकल्प दोहराया। एक हालिया बयान में उन्होंने कहा, "निज़ाम ने हैदराबाद बनाया, ब्रिटिश ने सिकंदराबाद जोड़ा, मैंने साइबराबाद बनाकर हैदराबाद को वैश्विक शहर बनाया। भगवान ने मुझे अब अमरावती बनाने का मौका दिया।" नायडू ने 2014-19 के अपने पहले कार्यकाल में अमरावती को राजधानी के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। 217 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट सिंगापुर सरकार की मदद से डिजाइन किया गया। 2019-24 में वाईएसआरसीपी सरकार ने तीन राजधानियों का प्रस्ताव देकर इसे रोक दिया। 2024 में टीडीपी की सत्ता वापसी के बाद नायडू ने अमरावती को एकमात्र राजधानी घोषित कर कार्य पुनः शुरू कराया। वर्तमान में ₹37,702 करोड़ के 38 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल में आधारशिला रखने वाले हैं। सात उप-शहरों में विभाजित अमरावती में सरकारी भवन, न्याय शहर, वित्त, ज्ञान, स्वास्थ्य, खेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मीडिया और पर्यटन क्षेत्र होंगे। 50 मंजिला सचिवालय, सात मंजिला हाईकोर्ट और विधानसभा 2028 तक तैयार होंगे। BITS पिलानी 2026 में शुरू होगा। कुल लागत ₹52,000-65,000 करोड़ आंकी गई है। नायडू ने 30 महीनों में प्रथम चरण पूरा करने का लक्ष्य रखा। अमरावती को दुनिया की शीर्ष पांच राजधानियों में शामिल करने का सपना देखा। स्मार्ट सिटी तकनीक, हरित ऊर्जा और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर। आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (APCRDA) कार्यान्वयन कर रही। नायडू ने भूमिपुत्रों के योगदान की सराहना की। यह प्रोजेक्ट निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास लाएगा। विश्वनाथमन्नू पदयात्रा के बाद किसानों का समर्थन मिला। सिंगापुर-जापान जैसे देश साझेदारी कर रहे। नायडू का विजन आंध्र को वैश्विक केंद्र बनाएगा।
by Dainikshamtak on | 2026-04-28 15:50:42