आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने प्रमुख युवा नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी के राज्यसभा उप‑नेता के पद से हटाने का निर्णय लिया है और आधिकारिक रूप से पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को नई डिप्टी लीडर नियुक्त किया है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र लिखकर चड्ढा के विरुद्ध पद से हटाने और उन्हें भविष्य में AAP के कोटे से हाउस में बोलने का समय जारी करने से रोकने की अनुमति मांगी है, जिसने लोक राजनीति में इस निर्णय को और भी भारी बना दिया है। AAP के राज्यसभा में कुल 10 सांसद हैं, जिनमें से सात पंजाब और तीन दिल्ली से चुने गए हैं, और इस संरचना में डिप्टी लीडर की भूमिका फ्लोर‑कोआर्डिनेशन और रणनीतिक बहस संचालन के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सूत्रों के अनुसार चड्ढा के खिलाफ यह कार्रवाई आंतरिक असंतोष और नीतिगत अंतरों के कारण पहले से बढ़ती तनाव का परिणाम है, जिसमें उनकी सार्वजनिक बयानबाजी, चुनाव‑रणनीति पर उठाए गए सवाल और पार्टी‑केंद्रित व्यवहार के आरोप शामिल हैं। इस निर्णय के बाद चड्ढा को आगे की बहसों और सत्रों में AAP‑लेबल के तहत माइक नहीं मिलने की संभावना है, जिससे उनकी संसदीय प्रकारी फैलाव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और इसे पार्टी आज‑कल अपने भीतर अनुशासन और केंद्रीय नियंत्रण बनाए रखने के प्रतीक के रूप में देख रही है। अशोक मित्तल, जो खुद भी पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं, अब पार्टी के लिए उच्च सदन की बैठकों की रणनीति तैयार करने, सदस्यों को समय‑आवंटन प्राप्त कराने और सत्ता‑विरोधी रणनीति के नेतृत्व में जिम्मेदारी लेंगे।
इस बदलाव को देश‑भर में AAP के भीतर “संगठनात्मक सुडान” और युवा‑केंद्रित नेतृत्व को थोड़ा पीछे धकेलने की नीति के रूप में पढ़ा जा रहा है, जहां केंद्रीय कमान अभी भी स्थापित नेताओं के माध्यम से संसदीय उपस्थिति को नियंत्रित करना चाहती है। राघव चड्ढा ने हाल के दिनों में पितृ‑छुट्टी सहित अनेक सामाजिक‑कानूनी सुधार‑प्रस्तावों पर लगातार बोलने के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उनके खिलाफ यह कदम सार्वजनिक रूप से चर्चा और विवाद को बढ़ाएगा। पार्टी अंदरूनी विवादों को न्यूनतम रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस निर्णय को कई विश्लेषक आगामी चुनावों से पहले AAP के भीतर बदलाव और नियंत्रण‑टकराव के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-04-02 16:15:16