उत्तर प्रदेश सरकार ने आज से एक नया खाद्य‑सुरक्षा नियम लागू कर दिया है, जिसके तहत अब राज्य के भीतर बेची जाने वाली हर अंडा पर पैदावार (दिन की तारीख) और एक्सपायरी या बेस्ट‑बिफोर तारीख साफ‑सुथरे ढंग से छापी जानी अनिवार्य होगी। इस नियम के अनुसार अंडा उत्पादकों, पोल्ट्री फार्मों, व्होलसेलर्स और फुटकर बिक्री वाले खुदरा दुकानदारों सभी पर यह जिम्मा होगा कि वे हर अंडा पर छोटे‑से‑छोटे आकार में भी दो जानकारियां—किस दिन अंडा दिया गया (प्रोडक्शन/लेयिंग डेट) और उसकी बेस्ट‑बिफोर या एक्सपायरी डेट—अवश्य प्रिंट करें। राज्य के खाद्य सुरक्षा व औषध प्रशासन (FDA) ने स्पष्ट किया है कि अंडा आमतौर पर दिन की तारीख से लगभग 28 दिन तक उपयोग करने के लिए सुरक्षित माना जाएगा और उस दौरान यह भी परख‑परीक्षा करना उपभोक्ता का अधिकार बन जाएगा कि जो अंडा उसे मिल रहा है वह उस अवधि से आगे न जाए।
इस नियम के तहत अंडा चाहे खुले रूप से (लूज) बेचा जा रहा हो या ट्रे/पैक में, दोनों ही स्थितियों में डेट‑स्टैंप अनिवार्य होगा, अन्यथा ऐसे स्टॉक को खाद्य सुरक्षा नियमों के विपरीत घोषित किया जा सकता है और उसे नष्ट करने का आदेश दिया जा सकता है या उसे ‘मानव‑उपभोग के लिए अनुपयुक्त’ के रूप में घोषित किया जा सकता है। राज्य सरकार का कहना है कि पिछले समय में अंडा उद्योग में ऐसे स्टॉक की बिक्री के मामले सामने आए थे जिनकी ताजगी की पुष्टि संभव नहीं थी और उपभोक्ता को यह भी पता नहीं कि वह कितना पुराना अंडा खा रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते थे। इसलिए डेट‑स्टैंपिंग की व्यवस्था न केवल खाद्य‑सुरक्षा बढ़ाएगी बल्कि पशुपालन और पोल्ट्री आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता भी लाएगी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी जिला स्तर पर दुकानों, मंडियों और फार्मों की नियमित जांच करेंगे और नियमों की उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मौजूदा खाद्य‑सुरक्षा कानून के तहत जुर्माना और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंडा जैसे खाद्य‑पदार्थ के लिए एक्सपायरी डेट सख्त‑सख्त सुरक्षा‑कट‑ऑफ के बजाय ताजगी‑सूचक मानी जाए, फिर भी 28 दिन से अधिक पुराने अंडे को बेचना खाद्य‑सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इस निर्णय को राज्य को देश में खाद्य‑सुरक्षा व पशुपालन नीतियों में अग्रणी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-04-02 15:29:58