इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत इस वर्ष 2026 के अंदर कम से कम चार सेमीकंडक्टर प्लांट (fabrication/OSAT इकाइयां) को उत्पादन‑तैयार अवस्था में ला देगा, जो देश के लिए सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में एक निर्णायक बदलाव का संकेत है। ये प्लांट सामान्यतः फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग (OSAT) जैसी चरण‑विशिष्ट प्रक्रियाओं पर आधारित हैं और इसमें कैमिकल इंडिया/CG पॉवर के सैनंद‑आधारित चिप‑फैब, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की मोरिगांव (असम) असेंबली‑टेस्ट यूनिट, माइक्रॉन टेक्नोलॉजी का गुजरात‑आधारित स्टोरेज‑चिप पैकेजिंग प्लांट और केनेस टेक्नोलॉजी की गुजरात में स्थापित OSAT इकाई शामिल हैं। वैष्णव का कहना है कि इन यूनिटों से अगले दो वर्षों में भारत दुनिया की सेमीकंडक्टर सप्लाई‑श्रृंखला में एक विश्वसनीय उत्पादन‑केंद्र के रूप में उभरेगा।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इन चार प्लांटों के अलावा, अधिक इकाइयां 2027 और 2028 के दौरान उपलब्ध होंगी, जिसमें दौलेरा (गुजरात) में स्थापित होने वाला भारत का पहला विशिष्ट सेमीकंडक्टर फैब शामिल है, जिसे 2028 तक वाणिज्यिक उत्पादन के लिए तैयार रखने की योजना है। इन योजनाओं को समर्थन देने के लिए सरकार ने ‘सेमीकॉन 2.0’ नामक दूसरे चरण की रणनीति तैयार की है, जिसके तहत चिप‑उत्पादन से जुड़े मशीनरी, गैस, रसायन और अन्य सामग्री को देशीय आधार पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। वैष्णव ने कहा कि भारत में निवेशकों की दिलचस्पी बेहद ऊंची है और टाइवान, जापान, दक्षिण कोरिया आदि देशों की कंपनियां भारत को आपूर्ति‑श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण अंग बनाने में गहरी रुचि रख रही हैं। इस निर्णय से स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, आइओटी और साइबर‑सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उपयोग होने वाली चिप्स की घरेलू अपेक्षा‑पूर्ति बढ़ेगी और विदेशी आयात पर भारत की निर्भरता में कमी आएगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल स्वाभिमान दोनों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
by Dainikshamtak on | 2026-04-02 16:06:49