भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने 6 मई 2025 को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों देशों के आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। तीन साल की गहन वार्ताओं और 14 दौर की बातचीत के बाद यह समझौता संभव हुआ। यह अब तक का सबसे व्यापक और संतुलित द्विपक्षीय व्यापार समझौता माना जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में 2040 तक £25.5 बिलियन (लगभग ₹2.7 लाख करोड़) की वृद्धि होने की संभावना है। भारत इस समझौते के तहत ब्रिटिश उत्पादों पर करीब 90% टैरिफ में कटौती करेगा। इसमें प्रमुख रूप से स्कॉच व्हिस्की, कारें, जिन, कॉस्मेटिक्स, मेडिकल उपकरण और विमानन क्षेत्र से संबंधित उत्पाद शामिल हैं। उदाहरण के लिए, स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स 150% से घटाकर 75% किया जाएगा और अगले 10 वर्षों में इसे 40% तक लाया जाएगा। इसी तरह, कारों पर लगने वाला टैक्स 100% से घटाकर 10% कर दिया जाएगा।
वहीं, ब्रिटेन भारतीय निर्यातों पर 99% तक आयात शुल्क समाप्त करेगा। इससे भारत के वस्त्र, आभूषण, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, चाय-कॉफी, खिलौने और ऑटो पार्ट्स जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा बाजार खोलने जैसा है।
FTA में सेवाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है। ब्रिटेन भारतीय IT और इंजीनियरिंग सेवाओं के लिए वीजा प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा। इसके अलावा, भारतीय पेशेवरों जैसे शेफ, योग प्रशिक्षक, नर्तक और संगीतज्ञों के लिए वीजा कोटा बढ़ाया गया है। साथ ही, भारतीय कर्मचारियों को यूके में अस्थायी रूप से काम करते समय दोहरे सोशल सिक्योरिटी टैक्स से छूट मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे "भारत के युवाओं और उद्योगों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर" बताया, वहीं ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि "यह ब्रेक्सिट के बाद यूके का सबसे महत्वपूर्ण समझौता है।"
यह समझौता भारत और यूके दोनों की आर्थिक रणनीतियों को मजबूती देगा और ‘मेक इन इंडिया’ व ‘ग्लोबल ब्रिटेन’ विज़न को नई दिशा प्रदान करेगा।
by Dainikshamtak on | 2025-05-06 23:56:17