रॉयल्टी राहत के बाद ONGC और Oil India के शेयरों में तेज उछाल

रॉयल्टी राहत के बाद ONGC और Oil India के शेयरों में तेज उछाल

Oil and Natural Gas Corporation और Oil India Limited के शेयरों में तेज बढ़त देखने को मिली, जहां दोनों कंपनियों के शेयर लगभग 9 प्रतिशत तक चढ़ गए। बाजार में यह तेजी केंद्र सरकार द्वारा तेल और गैस अन्वेषण पर रॉयल्टी बोझ कम करने के फैसले के बाद आई। इस कदम को भारत में अपस्ट्रीम तेल और गैस खोज तथा उत्पादन गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अपस्ट्रीम क्षेत्र में तेल और गैस की खोज, ड्रिलिंग और प्रारंभिक उत्पादन गतिविधियां शामिल होती हैं। यह क्षेत्र उच्च निवेश और जोखिम वाला माना जाता है, क्योंकि नई खोजों और उत्पादन परियोजनाओं के लिए भारी पूंजी की आवश्यकता होती है। ऐसे में रॉयल्टी और कर संरचना में राहत कंपनियों की लागत कम करने और निवेश आकर्षण बढ़ाने में मदद कर सकती है।

Oil and Natural Gas Corporation और Oil India Limited भारत की प्रमुख सरकारी ऊर्जा कंपनियों में शामिल हैं और देश के घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाना भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार लंबे समय से घरेलू हाइड्रोकार्बन उत्पादन बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतिगत सुधारों पर काम कर रही है। भारत में कई तेल और गैस ब्लॉकों में खोज संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन निवेश, लागत और नियामकीय चुनौतियों के कारण उत्पादन वृद्धि अपेक्षा से धीमी रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि रॉयल्टी बोझ कम होने से कंपनियों की लाभप्रदता और नकदी प्रवाह पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे नई खोज परियोजनाओं और उत्पादन विस्तार में निवेश बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें, तकनीकी चुनौतियां और उत्पादन लागत जैसे कारक भविष्य के प्रदर्शन को प्रभावित करते रहेंगे।

भारतीय शेयर बाजार में ऊर्जा क्षेत्र के शेयर अक्सर सरकारी नीतियों और वैश्विक तेल कीमतों से प्रभावित होते हैं। सरकार के फैसले के बाद निवेशकों ने इसे अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखा, जिससे संबंधित शेयरों में खरीदारी बढ़ी।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन क्षमता में सुधार होता है, तो इससे आयात निर्भरता कम करने और ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि भारत की कुल ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए घरेलू उत्पादन और आयात दोनों आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

फिलहाल बाजार और ऊर्जा क्षेत्र की नजर सरकार की आगे की नीतियों और कंपनियों की निवेश रणनीतियों पर बनी हुई है।

by Dainikshamtak on | 2026-05-12 15:39:43

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