भारत आने वाले वर्षों में अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े स्तर पर मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश ने वर्ष 2030 तक अपनी डेटा सर्वर क्षमता को लगभग छह गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। यह विस्तार बढ़ती इंटरनेट खपत, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सेवाओं और डेटा लोकलाइजेशन की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजारों में शामिल है, जहां करोड़ों लोग ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल भुगतान, वीडियो स्ट्रीमिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। इसके चलते डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की मांग लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार और निजी क्षेत्र दोनों मिलकर नए डेटा सेंटर और सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की तैयारी कर रहे हैं। मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, नोएडा और बेंगलुरु जैसे शहर देश के प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 5जी नेटवर्क विस्तार, एआई आधारित सेवाओं और डिजिटल गवर्नेंस कार्यक्रमों के कारण आने वाले वर्षों में डेटा उपयोग में और तेजी आएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा दक्ष और उच्च क्षमता वाले सर्वर नेटवर्क विकसित किए जा रहे हैं। भारत सरकार भी डेटा लोकलाइजेशन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने के लिए नीति स्तर पर कई कदम उठा रही है। विश्लेषकों के अनुसार डेटा सर्वर क्षमता बढ़ने से क्लाउड सेवाओं, स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल बैंकिंग और आईटी उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। भारत का यह लक्ष्य देश को वैश्विक डिजिटल और डेटा इकोनॉमी में महत्वपूर्ण स्थान दिलाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर उद्योग भारत के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-12 15:09:35