लखनऊ के 71 वर्षीय एक व्यक्ति ने NEET-UG के माध्यम से एमबीबीएस प्रवेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1% अलग आरक्षण की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में विभिन्न वर्गों को आरक्षण या विशेष प्रावधान उपलब्ध हैं, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि वरिष्ठ नागरिकों को भी एमबीबीएस प्रवेश में अलग से 1% आरक्षण या विशेष अवसर प्रदान करने पर विचार किया जाए। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही NEET-UG में आयु सीमा (Upper Age Limit) को समाप्त कर चुका है, जिसके बाद किसी भी आयु का पात्र अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो सकता है। ऐसे में याचिकाकर्ता का कहना है कि जब वरिष्ठ नागरिकों को परीक्षा देने की अनुमति है, तो उन्हें प्रवेश प्रक्रिया में भी सीमित स्तर पर विशेष प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। हालांकि, यह याचिकाकर्ता की मांग है और इस पर अभी अदालत ने कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत संबंधित पक्षों की दलीलें सुनेगी और कानून तथा संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर निर्णय करेगी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में आरक्षण नीति संविधान, न्यायिक निर्णयों और संबंधित कानूनों के आधार पर संचालित होती है। किसी नई श्रेणी के लिए आरक्षण लागू करने का प्रश्न संवैधानिक और नीतिगत दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस मामले का अंतिम परिणाम न्यायालय की सुनवाई और उसके आदेश पर निर्भर करेगा। यह मामला वरिष्ठ नागरिकों की शिक्षा तक पहुंच, समान अवसर और आरक्षण व्यवस्था को लेकर नई बहस भी शुरू कर सकता है। फिलहाल यह एक लंबित न्यायिक मामला है और इसकी अगली सुनवाई तथा अदालत के निर्देशों पर सभी की नजर बनी हुई है।
by Dainikshamtak on | 2026-08-03 16:32:51