केंद्र सरकार ने कहा है कि यदि भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending Programme) लागू नहीं होता, तो ईरान से जुड़े हालिया भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के दौरान पेट्रोल की खुदरा कीमत लगभग ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। सरकार के अनुसार इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और उपभोक्ताओं पर बढ़ती ईंधन कीमतों का प्रभाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत लगातार बढ़ाया है, जिससे तेल विपणन कंपनियों की लागत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव को सीमित करने में मदद मिली। अधिकारियों के अनुसार यह कार्यक्रम किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक रहा है, क्योंकि गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल की मांग में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इथेनॉल मिश्रण से न केवल पेट्रोलियम आयात बिल कम करने में सहायता मिलती है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने में भी योगदान मिलता है। हालांकि पेट्रोल की वास्तविक खुदरा कीमत कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, विनिमय दर, कर संरचना और सरकारी नीतियां शामिल हैं। सरकार ने दोहराया कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का विस्तार जारी रहेगा और इसका उद्देश्य ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करना तथा उपभोक्ताओं और किसानों दोनों को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाना है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में जैव ईंधन क्षेत्र में निवेश और तकनीकी विकास से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अधिक मजबूत हो सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-08-01 18:52:49