भारत और जापान ने दोनों देशों के बीच कौशल, रोजगार, शिक्षा और मानव संसाधन सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से भारत-जापान मानव संसाधन आदान-प्रदान एवं सहयोग योजना की शुरुआत की है। इस पहल के तहत दोनों देशों ने पांच लाख से अधिक लोगों के द्विपक्षीय आदान-प्रदान का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना के अनुसार लगभग 50,000 कुशल भारतीय कामगारों को जापान में रोजगार और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराने का भी लक्ष्य रखा गया है। यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है जब जापान वृद्ध होती आबादी और श्रमिकों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जबकि भारत के पास बड़ी संख्या में प्रशिक्षित और युवा कार्यबल उपलब्ध है। दोनों देशों का मानना है कि यह सहयोग आर्थिक विकास, तकनीकी साझेदारी और दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। इस योजना के अंतर्गत कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, भाषा शिक्षा, उद्योग-शिक्षा सहयोग, छात्र आदान-प्रदान तथा विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवर सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय युवाओं के लिए यह पहल अंतरराष्ट्रीय रोजगार, उच्च कौशल प्रशिक्षण और वैश्विक कार्य अनुभव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है। दूसरी ओर जापान को स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी, निर्माण, इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होंगे। भारत और जापान के बीच पहले से ही आर्थिक, सामरिक और प्रौद्योगिकी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। दोनों देश बुनियादी ढांचा, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, रक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी का विस्तार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव संसाधन सहयोग की यह नई योजना दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे भारतीय युवाओं को वैश्विक रोजगार के अवसर मिलेंगे, जबकि जापान को अपनी श्रम शक्ति की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी। आने वाले समय में इस योजना के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में विस्तृत कार्यान्वयन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और संस्थागत सहयोग की रूपरेखा भी चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।
by Dainikshamtak on | 2026-07-31 16:03:30