केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एनवीएस-03 उपग्रह के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। सरकार के अनुसार वर्तमान में भारत की स्वदेशी उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली नैविक (NavIC) की पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग (पीएनटी) सेवाओं के लिए केवल तीन उपग्रह पूरी तरह परिचालन में हैं। इसी कारण पूर्ण क्षमता के साथ नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराने में चुनौतियां बनी हुई हैं। सरकार का कहना है कि एनवीएस-03 के सफल प्रक्षेपण के बाद नैविक उपग्रह समूह को और मजबूती मिलेगी तथा देश की स्वदेशी नेविगेशन सेवाओं की विश्वसनीयता और कवरेज में सुधार होगा। नैविक भारत की स्वदेशी क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से भारत और इसके आसपास के क्षेत्रों में सटीक स्थान, दिशा और समय संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। इसका उपयोग नागरिकों के साथ-साथ रक्षा, समुद्री परिवहन, आपदा प्रबंधन, सड़क परिवहन, मत्स्य पालन, रेलवे, विमानन और विभिन्न सरकारी सेवाओं में किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भरता कम करने के लिए नैविक का मजबूत और पूर्ण परिचालन अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार पिछले कुछ वर्षों से नैविक नेटवर्क के आधुनिकीकरण और नई पीढ़ी के एनवीएस उपग्रहों के विकास पर लगातार निवेश कर रही है। एनवीएस श्रृंखला के उपग्रहों में बेहतर नेविगेशन पेलोड, अधिक सटीक समय निर्धारण और उन्नत तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए इसरो लगातार नई परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। एनवीएस-03 का प्रक्षेपण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके सफल संचालन के बाद नैविक प्रणाली की उपलब्धता, विश्वसनीयता और सटीकता में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे नागरिक और रणनीतिक दोनों क्षेत्रों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
by Dainikshamtak on | 2026-07-30 23:59:33