केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए चावल का आवंटन केवल तब किया जाता है जब देश की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं और निर्धारित बफर स्टॉक मानकों को पूरी तरह सुनिश्चित कर लिया जाता है। सरकार के अनुसार सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसके बाद यदि पर्याप्त अधिशेष चावल उपलब्ध रहता है, तभी उसे इथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित किया जाता है। सरकार का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है। भारत पिछले कुछ वर्षों से इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिसके तहत पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना तथा पर्यावरणीय दृष्टि से स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। सरकार ने यह भी दोहराया कि खाद्यान्न की उपलब्धता, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की आवश्यकताओं और भारतीय खाद्य निगम के बफर स्टॉक मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि यदि अधिशेष खाद्यान्न का वैज्ञानिक और नियोजित तरीके से उपयोग किया जाए, तो इससे किसानों, जैव ईंधन उद्योग और अर्थव्यवस्था तीनों को लाभ मिल सकता है। दूसरी ओर, खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों की निरंतर निगरानी भी आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की आपूर्ति संबंधी चुनौती उत्पन्न न हो। सरकार का कहना है कि इथेनॉल कार्यक्रम को लागू करते समय उपलब्ध खाद्यान्न, कृषि उत्पादन और राष्ट्रीय आवश्यकताओं का नियमित आकलन किया जाता है। आने वाले समय में जैव ईंधन क्षेत्र के विस्तार के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नीतिगत निर्णय लिए जाते रहेंगे।
by Dainikshamtak on | 2026-07-30 23:58:37