छह साल बाद उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू, स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

छह साल बाद उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू, स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) के माध्यम से भारत-चीन सीमा व्यापार लगभग छह वर्षों के अंतराल के बाद फिर से शुरू हो गया है। इस फैसले को सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमा व्यापार के दोबारा शुरू होने से पिथौरागढ़ और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को आर्थिक गतिविधियों में नई गति मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, व्यापार पूर्व निर्धारित नियमों, सीमा व्यापार समझौतों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित किया जाएगा। लिपुलेख दर्रा भारत और तिब्बत (चीन) के बीच पारंपरिक व्यापार मार्गों में से एक रहा है, जहां वर्षों से सीमित सूची में शामिल वस्तुओं का आदान-प्रदान होता रहा है। कोविड-19 महामारी, सीमा संबंधी परिस्थितियों और अन्य कारणों से पिछले छह वर्षों से यह व्यापार बंद था। अब इसके दोबारा शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों, परिवहन सेवाओं और छोटे व्यवसायों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा व्यापार केवल आर्थिक गतिविधि तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में आजीविका, सांस्कृतिक संपर्क और पारंपरिक व्यापारिक संबंधों को भी मजबूत करता है। हालांकि, यह व्यापार निर्धारित सीमा, स्वीकृत वस्तुओं की सूची और संबंधित प्रशासनिक एवं सुरक्षा नियमों के तहत ही किया जाएगा। भारत और चीन के बीच सीमा पर संवेदनशील परिस्थितियों के बावजूद स्थानीय स्तर पर पारंपरिक व्यापार को फिर से शुरू करना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, स्थानीय रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी है। व्यापारियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आने वाले समय में व्यापार की मात्रा और इसके आर्थिक प्रभाव पर सभी की नजर रहेगी।

by Dainikshamtak on | 2026-08-03 16:33:49

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