दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि राज्य सरकार आगामी पांच वर्षों में स्टार्टअप नीति पर ₹400 करोड़ का निवेश करेगी। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को रोजगार खोजने वालों (Job Seekers) से रोजगार देने वाले उद्यमियों (Job Creators) में बदलना और दिल्ली को देश के प्रमुख स्टार्टअप एवं नवाचार केंद्रों में शामिल करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति के तहत नवाचार, उद्यमिता और तकनीक आधारित व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का लक्ष्य युवाओं, छात्रों, शोधकर्ताओं और नए उद्यमियों को वित्तीय सहायता, मेंटरशिप, कौशल विकास, बिजनेस नेटवर्किंग और निवेशकों तक पहुंच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही महिला उद्यमियों, सामाजिक उद्यमों और उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कार्य करने वाले स्टार्टअप्स को भी विशेष प्रोत्साहन देने की योजना है। मुख्यमंत्री के अनुसार यह नीति दिल्ली में नवाचार की संस्कृति को मजबूत करेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस निवेश का प्रभावी उपयोग किया गया, तो इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, फिनटेक, हेल्थटेक, एडटेक, ग्रीन टेक्नोलॉजी और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली पहले से ही देश के प्रमुख स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल है और नई नीति से इस स्थिति को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि स्टार्टअप्स केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे नवाचार, निवेश, तकनीकी विकास और आर्थिक वृद्धि को भी गति देते हैं। सरकार का कहना है कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों, उद्योग संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। यदि यह योजना निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली में उद्यमिता को नई दिशा मिल सकती है और बड़ी संख्या में युवा अपने स्वयं के व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-07-17 13:41:52