केंद्र सरकार के शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में चालू वित्त वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आयकर विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक का शुद्ध प्रत्यक्ष कर राजस्व 16.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 6.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्रत्यक्ष कर संग्रह में व्यक्तिगत आयकर, कॉर्पोरेट कर तथा अन्य प्रत्यक्ष कर शामिल होते हैं, जो सरकार के राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। कर संग्रह में यह वृद्धि देश की आर्थिक गतिविधियों, बेहतर कर अनुपालन, डिजिटल कर प्रशासन और करदाताओं के बढ़ते आधार का संकेत मानी जा रही है। वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग पिछले कुछ वर्षों से कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने पर लगातार कार्य कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-फाइलिंग, डेटा विश्लेषण, डिजिटल सत्यापन और कर प्रशासन में सुधार जैसे कदमों से कर संग्रह की दक्षता बढ़ी है। प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि से केंद्र सरकार को आधारभूत ढांचे, सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा और पूंजीगत व्यय जैसी विकास परियोजनाओं के लिए अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि वित्त वर्ष के शेष महीनों में भी कर संग्रह की यही गति बनी रहती है, तो सरकार के राजकोषीय लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता मिल सकती है। साथ ही यह संकेत भी मिलता है कि औपचारिक अर्थव्यवस्था का दायरा लगातार बढ़ रहा है और करदाताओं की भागीदारी में सुधार हो रहा है। हालांकि वित्त वर्ष के अंतिम आंकड़े अग्रिम कर भुगतान, कर रिफंड और आगामी महीनों के संग्रह पर भी निर्भर करेंगे। सरकार का कहना है कि करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को और सरल बनाने तथा स्वैच्छिक कर अनुपालन को प्रोत्साहित करने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और राजस्व प्रबंधन की दिशा में सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-15 14:53:44