महाराष्ट्र सरकार बाल विवाह की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से एक नई पहल पर विचार कर रही है, जिसके तहत विवाह निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि को अनिवार्य रूप से दर्ज करना पड़ सकता है। राज्य सरकार का मानना है कि इस कदम से विवाह के समय दोनों पक्षों की आयु की प्राथमिक जांच आसान होगी और कम उम्र में होने वाले विवाहों की पहचान करने में प्रशासन को सहायता मिलेगी। भारत में बाल विवाह निषेध कानून के अनुसार पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित है। इसके बावजूद देश के कुछ क्षेत्रों में बाल विवाह की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। अधिकारियों का कहना है कि विवाह निमंत्रण पत्रों पर जन्मतिथि अंकित होने से समाज में जागरूकता बढ़ेगी और आयु संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस प्रस्ताव के तहत विवाह आयोजकों, प्रिंटिंग प्रेस संचालकों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं बल्कि सामाजिक स्तर पर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना भी है। महिला एवं बाल विकास से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह शिक्षा, स्वास्थ्य और महिलाओं के सशक्तिकरण पर दीर्घकालिक प्रभाव डालता है। इसलिए ऐसी पहलों को सामाजिक सुधार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि इस प्रस्ताव के कार्यान्वयन के दौरान गोपनीयता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होगी। राज्य सरकार विभिन्न हितधारकों के सुझावों और कानूनी प्रावधानों का अध्ययन कर रही है ताकि नीति को प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जा सके। महाराष्ट्र लंबे समय से महिला शिक्षा, बाल संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों पर कार्य कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो यह बाल विवाह रोकने की दिशा में एक अभिनव प्रशासनिक उपाय साबित हो सकता है। आने वाले समय में सरकार इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश और कार्यान्वयन प्रक्रिया की घोषणा कर सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-25 14:03:02