पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी आंतरिक संघर्ष और गहरा हो गया है। पार्टी के एक बागी गुट ने दावा किया है कि उसने ममता बनर्जी को पार्टी प्रमुख के पद से हटा दिया है और संगठन के लिए नई नेतृत्व संरचना की घोषणा की है। बागी गुट के नेताओं का कहना है कि उन्हें पार्टी के कई विधायकों और पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है तथा वे स्वयं को तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक प्रतिनिधि मानते हैं। रिपोर्टों के अनुसार बागी खेमे ने वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को संगठन का नया अध्यक्ष घोषित किया है और चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी कर रहा है।
हालांकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक गुट ने इन दावों को खारिज कर दिया है। पार्टी के आधिकारिक संगठन ने चुनाव आयोग को नई पदाधिकारी सूची भेजते हुए स्पष्ट किया है कि ममता बनर्जी ही तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष बनी हुई हैं और बागी नेताओं को संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के इस्तीफों तथा गुटबंदी की खबरों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। हाल के दिनों में पार्टी फंड, संगठनात्मक नियंत्रण और नेतृत्व को लेकर विवाद लगातार बढ़ता गया है। कुछ नेताओं के इस्तीफे और कई प्रमुख चेहरों के बागी खेमे के संपर्क में आने की खबरों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चा को और तेज कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी की भविष्य की दिशा, संगठनात्मक नियंत्रण और राजनीतिक रणनीति से भी जुड़ा हुआ है। यदि दोनों गुट अपने-अपने दावे जारी रखते हैं, तो आने वाले समय में चुनाव आयोग और अन्य संस्थागत प्रक्रियाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के भीतर शक्ति संघर्ष खुलकर सामने आ गया है और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इसके व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-23 15:02:38