केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमत पर खरीदे गए कच्चे तेल की खेप जब भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंच जाएगी और उसका प्रसंस्करण शुरू होगा, तब देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बन सकती है। मंत्री ने कहा कि ईंधन मूल्य निर्धारण कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, परिवहन लागत, विनिमय दर और रिफाइनिंग प्रक्रिया शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का प्रभाव घरेलू ईंधन कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता, क्योंकि तेल विपणन कंपनियां पहले से खरीदे गए स्टॉक और आपूर्ति श्रृंखला के आधार पर काम करती हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयातित तेल के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव देश की ऊर्जा लागत पर पड़ता है। हाल के दिनों में वैश्विक तेल बाजार में भू-राजनीतिक घटनाओं, आपूर्ति की स्थिति और मांग में बदलाव के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल पर्याप्त मात्रा में भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचता है और वैश्विक बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं, तो तेल विपणन कंपनियों के लिए उपभोक्ताओं को राहत देना आसान हो सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित कंपनियों की वाणिज्यिक समीक्षा और बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। पेट्रोल और डीजल की कीमतें देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डालती हैं, क्योंकि इनका असर परिवहन लागत, महंगाई और विभिन्न क्षेत्रों की उत्पादन लागत पर पड़ता है। उपभोक्ता लंबे समय से ईंधन कीमतों में संभावित राहत की उम्मीद कर रहे हैं। हरदीप सिंह पुरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर निवेशकों और नीति निर्माताओं की नजर बनी हुई है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू आपूर्ति की स्थिति के आधार पर ईंधन कीमतों को लेकर अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-21 19:23:18