आंध्र प्रदेश के अमरावती स्थित क्वांटम प्रौद्योगिकी केंद्र ने अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र के वैज्ञानिकों ने स्वदेशी रूप से विकसित एक विशेष रेफ्रिजरेशन प्रणाली को लगभग -269 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करने में सफलता प्राप्त की है। यह तापमान परम शून्य तापमान के बेहद करीब माना जाता है और क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत भौतिकी अनुसंधान तथा सुपरकंडक्टिंग प्रौद्योगिकियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इतनी कम तापमान वाली प्रणालियां क्वांटम बिट्स अर्थात क्यूबिट्स को स्थिर बनाए रखने में सहायता करती हैं, जो भविष्य की क्वांटम कंप्यूटिंग तकनीकों का आधार हैं। इस उपलब्धि को भारत की स्वदेशी वैज्ञानिक क्षमता और उच्च प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि परम शून्य के निकट तापमान प्राप्त करना अत्यंत जटिल इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके लिए विशेष उपकरणों और उच्च स्तर की तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है। अमरावती में विकसित यह प्रणाली देश में क्वांटम अनुसंधान अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। भारत सरकार भी हाल के वर्षों में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के माध्यम से क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसर और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास पर विशेष जोर दे रही है। इस मिशन का उद्देश्य भारत को उभरती हुई क्वांटम प्रौद्योगिकियों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि स्वदेशी क्रायोजेनिक और अल्ट्रा-लो टेम्परेचर प्रणालियों का विकास देश को रणनीतिक और तकनीकी दृष्टि से अधिक आत्मनिर्भर बना सकता है। इसके अतिरिक्त ऐसी उपलब्धियां रक्षा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा अनुसंधान और उन्नत कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में भी दूरगामी प्रभाव डाल सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार क्वांटम प्रौद्योगिकी आने वाले दशकों में वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा का प्रमुख क्षेत्र बनने जा रही है। अमरावती क्वांटम केंद्र की यह सफलता भारत की वैज्ञानिक प्रगति, अनुसंधान क्षमता और नवाचार शक्ति को प्रदर्शित करती है तथा देश को उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं की ओर अग्रसर करती है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-23 15:12:25