नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने कहा है कि भारत को कृषि क्षेत्र की संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान करने के लिए अतिरिक्त श्रमबल को कृषि से निकालकर उद्योग, सेवाओं और अन्य उत्पादक क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित करना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग एक-छठा योगदान देते हैं, जबकि देश की लगभग आधी आबादी आज भी अपनी आजीविका के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर है। उनके अनुसार जब इतनी बड़ी आबादी अपेक्षाकृत कम आर्थिक उत्पादन वाले क्षेत्र पर निर्भर रहती है तो आय संबंधी असमानताएं और आर्थिक दबाव स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होते हैं। अशोक लाहिड़ी ने यह टिप्पणी कृषि बाजार सुधारों और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान की। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक समाधान केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रमबल को अधिक उत्पादक क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में कुशल बाजार व्यवस्था विकसित करने, किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा सब्सिडी आधारित समर्थन के स्थान पर प्रत्यक्ष आय हस्तांतरण जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया। लाहिड़ी ने कहा कि भारत के डेयरी, मत्स्य और पोल्ट्री जैसे कई क्षेत्रों ने बिना व्यापक न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था के भी उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार आधारित सुधार और प्रतिस्पर्धी ढांचा भी विकास को गति दे सकते हैं। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था के प्रभावों पर चर्चा करते हुए कहा कि इसका लाभ सीमित संख्या में किसानों तक पहुंचता है, जबकि इससे फसल पैटर्न और संसाधनों के उपयोग पर व्यापक असर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के आर्थिक विकास की अगली अवस्था में विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ऐसे में कृषि पर निर्भर आबादी का धीरे-धीरे विविध आर्थिक गतिविधियों की ओर स्थानांतरण ग्रामीण आय बढ़ाने और समग्र आर्थिक उत्पादकता को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। यह बहस लंबे समय से भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास मॉडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है और नीति निर्माताओं के लिए आगे भी प्रमुख विषय बनी रह सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-13 01:50:20