भारत सरकार ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रेट निकोबार द्वीप पर लगभग ₹13,000 करोड़ की लागत से विकसित किए जाने वाले ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना ग्रेट निकोबार समग्र विकास योजना का एक प्रमुख हिस्सा मानी जा रही है। प्रस्तावित हवाई अड्डे को इस प्रकार विकसित किया जाएगा कि इसका उपयोग नागरिक उड्डयन सेवाओं के साथ-साथ सैन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक स्थान रखता है। यह द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक माना जाता है। ऐसे में आधुनिक हवाई अड्डे का निर्माण क्षेत्र में संपर्क, सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान कर सकता है। परियोजना के तहत अत्याधुनिक अवसंरचना विकसित की जाएगी, जिससे बड़े विमानों का संचालन संभव हो सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
साथ ही आपदा प्रबंधन और राहत अभियानों के दौरान भी यह हवाई अड्डा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दोहरे उपयोग वाली यह सुविधा भारत की समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने में सहायक हो सकती है। हाल के वर्षों में भारत ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है, ताकि क्षेत्रीय संपर्क और रणनीतिक तैयारियों को बेहतर बनाया जा सके। पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी इस परियोजना पर व्यापक चर्चा होती रही है और विभिन्न स्तरों पर आवश्यक स्वीकृतियों तथा अध्ययन प्रक्रियाओं को पूरा किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक हवाई अड्डे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की दीर्घकालिक आर्थिक और सामरिक उपस्थिति को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। ग्रेट निकोबार में बनने वाला यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट भविष्य में क्षेत्रीय विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-11 14:58:34