केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले समान नागरिक संहिता यानी UCC के दायरे से सभी आदिवासी समुदायों को बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की परंपराएं, रीति-रिवाज, सांस्कृतिक पहचान और उनके पारंपरिक अधिकार UCC से प्रभावित नहीं होंगे। शाह का यह बयान उस समय आया जब UCC को लेकर देश में राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है और कई विपक्षी दलों ने आदिवासी समाज पर इसके संभावित असर को लेकर सवाल उठाए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति साफ है और इस विषय में किसी भी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों में UCC लागू किया जाएगा, वहां भी आदिवासी समुदायों को विशेष सुरक्षा और छूट दी जाएगी। शाह के मुताबिक, संविधान और परंपरा दोनों को ध्यान में रखते हुए आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। उनका कहना था कि UCC का उद्देश्य देश में नागरिक कानूनों को समान रूप से लागू करना है, लेकिन यह आदिवासी समाज की विशिष्ट सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक व्यवस्था पर लागू नहीं होगा। इस बयान को आदिवासी समुदायों को भरोसा देने वाले राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि UCC के जरिए अल्पसंख्यक और आदिवासी पहचान पर असर पड़ सकता है। शाह ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि सरकार किसी भी आदिवासी समूह के अधिकार, भूमि, परंपरा या रीति-रिवाज से समझौता नहीं करेगी। इस स्पष्टीकरण के बाद UCC पर जारी राष्ट्रीय बहस में एक नया आयाम जुड़ गया है और अब राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।।
by Dainikshamtak on | 2026-05-26 15:29:07