केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा है कि सरकार शेयर बाजार निवेशकों की उन चिंताओं को सुनने के लिए हमेशा तैयार और इच्छुक है, जो कर व्यवस्था से जुड़ी हैं, खासकर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्सेशन को लेकर। वित्त मंत्री के इस बयान को निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है, क्योंकि पूंजीगत लाभ कर से जुड़े नियम सीधे तौर पर निवेश व्यवहार, पोर्टफोलियो रणनीति और बाजार में भागीदारी को प्रभावित करते हैं। उनका यह कहना ऐसे समय में आया है जब निवेशक कर ढांचे की स्थिरता, दरों की निष्पक्षता और अनुपालन की सरलता को लेकर लगातार सुझाव देते रहे हैं। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार बाजार की बात को गंभीरता से सुनती है और कर नीति को इस तरह संतुलित रखने की कोशिश करती है कि राजस्व हितों के साथ निवेश माहौल भी प्रभावित न हो। एलटीसीजी और एसटीसीजी पर कर की संरचना कई निवेशकों के लिए खास महत्व रखती है, क्योंकि इनके आधार पर यह तय होता है कि दीर्घकालिक निवेश को किस हद तक प्रोत्साहन मिलेगा और अल्पकालिक ट्रेडिंग पर क्या असर पड़ेगा। नीति-निर्माताओं के लिए यह विषय इसलिए भी अहम है, क्योंकि शेयर बाजार में व्यापक भागीदारी देश की वित्तीय गहराई और पूंजी निर्माण से जुड़ी होती है। वित्त मंत्री का यह आश्वासन बाजार में पारदर्शिता और संवाद की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। निवेश समुदाय आम तौर पर यह चाहता है कि कर नियम सरल हों, बार-बार बदलाव न हों और दीर्घकालिक पूंजी निर्माण को बढ़ावा मिले। सरकार की ओर से ऐसी खुली प्रतिक्रिया से यह संदेश जाता है कि पूंजी बाजार केवल निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब बाजार की निगाहें इस पर टिकी रहेंगी कि आगे कर नीति में किसी प्रकार के परामर्श, समीक्षा या समायोजन की प्रक्रिया सामने आती है या नहीं।।
by Dainikshamtak on | 2026-05-26 15:26:00