Assam विधानसभा में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) से जुड़ा विधेयक पेश किया गया है, जिसका Indian National Congress ने विरोध किया। इस विधेयक को राज्य में विवाह, पारिवारिक कानून और नागरिक संबंधों के लिए एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, विधेयक में पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही बहुविवाह (polygamy) पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, विवाह आयु और बहुविवाह से जुड़े मुद्दे लंबे समय से सामाजिक और कानूनी बहस का हिस्सा रहे हैं।
विधेयक में live-in relationships के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करने का प्रावधान भी शामिल बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को कानूनी मान्यता और संरक्षण देने की बात कही गई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रावधान बच्चों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
Indian National Congress सहित विपक्षी दलों ने विधेयक का विरोध किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, समान नागरिक संहिता का मुद्दा लंबे समय से भारतीय राजनीति और संवैधानिक बहस का संवेदनशील विषय रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि UCC का मूल विचार विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून लागू करना है, जिससे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समानता सुनिश्चित की जा सके। समर्थक इसे लैंगिक समानता और कानूनी एकरूपता से जोड़ते हैं, जबकि आलोचक धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताते हैं।
Assam हाल के वर्षों में व्यक्तिगत कानूनों और सामाजिक सुधारों से जुड़े कई विधायी कदमों पर चर्चा का केंद्र रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, राज्य स्तर पर UCC जैसे प्रयास राष्ट्रीय स्तर की बहस को भी प्रभावित कर सकते हैं।
सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में विधेयक को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे सामाजिक सुधार और महिलाओं के अधिकारों से जोड़ा, जबकि कई समूहों ने सांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे उठाए।
फिलहाल Assam विधानसभा में पेश UCC विधेयक राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना हुआ है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-25 21:07:26