केंद्र सरकार ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए Letter of Request (LoR) को अंतिम रूप दे दिया है। यह निर्णय सामरिक क्षमता बढ़ाने और वैमानिक सिद्धताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार LoR में विमानों की तकनीकी विशिष्टताएँ, संविदात्मक शर्तें, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स सहायता और स्पेयर पार्ट्स की व्यवस्था शामिल है। खरीद के इस पैकेज में विमानों के साथ-साथ निर्माण, रखरखाव और आयु-सम्बन्धी गारंटी से जुड़ी शर्तों का उल्लेख है। रक्षा मंत्रालय और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई दौर की आवश्यक तकनीकी और वित्तीय समीक्षा के बाद इस दस्तावेज़ को अंतिम रूप दिया। इस सौदे का उद्देश्य मौजूदा फाइटर बेड़े की गति, श्रेणी और बहुआयामी संचालन क्षमता को बढ़ाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि 114 राफेल विमानों के आगमन से क्षेत्रीय सामरिक संतुलन पर प्रभाव पड़ेगा और भारतीय वायुक्षेत्र की त्वरित प्रत्यास्थता में सुधार होगा। इससे न केवल वायुसेना के बहुभूमिका अभियानों की सफलता बढ़ेगी बल्कि दोहरे-इंजन क्षमता, उन्नत एवियोनिक्स और हथियार प्रणालियों के कारण परिचालन विकल्पों में विस्तार होगा। सरकार ने यह भी ध्यान रखा है कि हस्तक्षेपहीन प्रशिक्षण, सप्लाई-चेन सुरक्षा और संयुक्त लॉजिस्टिक सपोर्ट शामिल हों ताकि विमानों का दीर्घकालिक संचालन सक्षम रहे। वित्तपोषण मॉडल और भुगतान की शर्तों पर अंतिम बातचीत जारी है, जिनमें ऋण व्यवस्था, क्रेडिट गारंटी और भुगतान अनुसूची शामिल हो सकते हैं। रक्षा अधिग्रहण विशेषज्ञों ने कहा कि अनुबंध पर हस्ताक्षर के बाद निर्माण तथा डिलीवरी का चरण शुरू होगा, जिसमें समय-सीमा, माइलस्टोन और अनुसरणीय प्रदर्शन संकेतक तय होंगे। इसे भारतीय वायुसेना की आधुनिकता में एक मील का पत्थर माना जा रहा है और यह न केवल क्षमता वृद्धि का मामला है बल्कि दीर्घकालिक रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी का संकेत भी है। सरकार द्वारा इस LoR को अंतिम करने के बाद अब औपचारिक अनुबंध प्रक्रिया, परामर्श और पारिश्रमिकिक क्रियान्वयन के अगले चरण उठेंगे।।
by Dainikshamtak on | 2026-05-25 17:45:22