वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ऊर्जा बचत और आत्मनिर्भरता को लेकर कई महत्वपूर्ण अपीलें की हैं। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन, कार-पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ता है, इसलिए ऊर्जा संरक्षण राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन गया है। प्रधानमंत्री ने लोगों से गैर-जरूरी विदेशी पर्यटन को सीमित करने और अनावश्यक सोने की खरीद से बचने की भी अपील की। उनका कहना था कि विदेशी मुद्रा के दबाव को कम करने और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए विवेकपूर्ण खर्च जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने कंपनियों और संस्थानों से वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की व्यवस्था को फिर से बढ़ावा देने पर विचार करने का सुझाव दिया, ताकि ईंधन खपत और यातायात दबाव कम किया जा सके। प्रधानमंत्री ने किसानों से भी रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में 50 प्रतिशत तक कमी लाने की अपील की और प्राकृतिक खेती तथा संतुलित कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और आयातित उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की ये अपीलें केवल अल्पकालिक ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की रणनीति से जुड़ी हुई हैं। हाल के महीनों में वैश्विक तेल कीमतों में तेजी, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन बाधाओं ने कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में सरकार ऊर्जा संरक्षण और घरेलू संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग को प्राथमिकता देती दिखाई दे रही है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-10 23:49:09