प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस का “बहुत संयम” के साथ उपयोग करने की अपील की है। वैश्विक ऊर्जा संकट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री ने ऊर्जा संरक्षण को राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताते हुए नागरिकों से ईंधन बचत की दिशा में सक्रिय कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि देश के लोग सामूहिक रूप से ईंधन की खपत कम करने का प्रयास करें तो इससे आर्थिक दबाव कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग, कारपूलिंग को बढ़ावा देने और वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की व्यवस्था को फिर से अपनाने जैसे सुझाव दिए। उनका कहना था कि इन उपायों से सड़क यातायात कम होगा, ईंधन की बचत होगी और पर्यावरणीय प्रदूषण में भी कमी आएगी। हाल के महीनों में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है। भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह अपील केवल अल्पकालिक ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और सतत विकास रणनीति का हिस्सा भी है। उन्होंने लोगों से अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने और जहां संभव हो वहां साझा परिवहन विकल्प अपनाने का आग्रह किया। विश्लेषकों के अनुसार यदि बड़े पैमाने पर लोग सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग का उपयोग बढ़ाते हैं तो इससे ईंधन आयात पर दबाव कम हो सकता है। इसके साथ ही वर्क फ्रॉम होम मॉडल से ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री की यह अपील ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और आर्थिक संतुलन के व्यापक संदेश के रूप में देखी जा रही है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-11 15:47:22