Government of Delhi ने दिल्ली के सेंट्रल रिज क्षेत्र की 673.32 हेक्टेयर भूमि को आधिकारिक रूप से “आरक्षित वन” घोषित कर दिया है। इस फैसले को राजधानी में पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र सुरक्षा और शहरी पारिस्थितिकी संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य रिज क्षेत्र को अतिक्रमण, अवैध निर्माण और पर्यावरणीय क्षति से अधिक कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।
Central Ridge दिल्ली रिज का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और इसे राष्ट्रीय राजधानी का “ग्रीन लंग” भी कहा जाता है। रिज क्षेत्र अरावली पर्वतमाला का विस्तार है और यह दिल्ली के तापमान नियंत्रण, वायु गुणवत्ता सुधार तथा जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, तेजी से शहरीकरण के बीच ऐसे हरित क्षेत्रों का संरक्षण राजधानी के दीर्घकालिक पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहद जरूरी है।
आरक्षित वन का दर्जा मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र में भूमि उपयोग और निर्माण गतिविधियों पर कड़े कानूनी प्रावधान लागू होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अधिसूचना वन संरक्षण और भूमि सुरक्षा के लिए प्रशासनिक कार्रवाई को मजबूत बनाती है। इससे अवैध अतिक्रमण और अनधिकृत विकास गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई आसान हो सकती है।
दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण, घटते हरित क्षेत्र और बढ़ते शहरी दबाव जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में Central Ridge जैसे प्राकृतिक क्षेत्रों की सुरक्षा को पर्यावरणीय नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। कई पर्यावरण समूह वर्षों से रिज क्षेत्र को अधिक कानूनी संरक्षण देने की मांग करते रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, राजधानी में हरित क्षेत्रों के संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। दिल्ली में भूमि की सीमित उपलब्धता और बढ़ती आबादी के कारण बुनियादी ढांचा विस्तार तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच अक्सर बहस देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कानूनी संरक्षण पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रभावी निगरानी, वन पुनर्स्थापन, कचरा प्रबंधन और स्थानीय पारिस्थितिकी संरक्षण पर भी लगातार ध्यान देना होगा। रिज क्षेत्र में कई प्रकार की वनस्पतियां, पक्षी और वन्यजीव पाए जाते हैं, जिससे इसका पारिस्थितिक महत्व और बढ़ जाता है।
फिलहाल Government of Delhi के इस फैसले को राजधानी के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस अधिसूचना के प्रभाव और संरक्षण उपायों पर पर्यावरण विशेषज्ञों और नागरिक समूहों की नजर बनी रहेगी।
by Dainikshamtak on | 2026-05-11 16:23:34