भारत सरकार ने ग्रीनफील्ड टोल-रोड परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देने के लिए पेंशन फंड्स और सॉवरेन वेल्थ फंड्स को सीधे बोली लगाने की अनुमति दे दी है। इस कदम को देश के सड़क और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में दीर्घकालिक वैश्विक निवेश आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण नीति बदलाव माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेंशन फंड्स और सॉवरेन वेल्थ फंड्स आमतौर पर स्थिर और लंबी अवधि वाले निवेश अवसरों की तलाश करते हैं। सड़क परियोजनाओं से मिलने वाली नियमित टोल आय को ऐसे निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न वाला क्षेत्र माना जाता है। नई व्यवस्था से भारत के हाईवे और एक्सप्रेसवे विकास कार्यक्रमों को अतिरिक्त वित्तीय समर्थन मिल सकता है।
ग्रीनफील्ड टोल-रोड परियोजनाएं वे सड़क परियोजनाएं होती हैं जिन्हें पूरी तरह नए सिरे से विकसित किया जाता है। इनमें भूमि अधिग्रहण, निर्माण और संचालन की जिम्मेदारियां शामिल होती हैं। सरकार पिछले कुछ वर्षों से सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के जरिए सड़क अवसंरचना विस्तार पर जोर दे रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत तेजी से अपने राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और इसके लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश की आवश्यकता है। ऐसे में वैश्विक दीर्घकालिक निवेशकों को सीधे भागीदारी की अनुमति देने से परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाना आसान हो सकता है। इससे घरेलू वित्तीय संस्थानों पर दबाव भी कम हो सकता है।
हाल के वर्षों में भारत का बुनियादी ढांचा क्षेत्र विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है। कई वैश्विक फंड पहले से ही परिचालन में मौजूद सड़क, हवाईअड्डा, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स परिसंपत्तियों में निवेश कर चुके हैं। हालांकि ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में सीधे बोली लगाने की अनुमति निवेश दायरे को और विस्तारित कर सकती है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क अवसंरचना को देश की आर्थिक वृद्धि और लॉजिस्टिक्स दक्षता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बेहतर सड़क नेटवर्क से माल परिवहन लागत कम करने, औद्योगिक कनेक्टिविटी बढ़ाने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देने में मदद मिल सकती है।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, नियामकीय मंजूरी और निर्माण समयसीमा जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। इसलिए निवेशकों के लिए नीतिगत स्थिरता और परियोजना निष्पादन क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल इस फैसले को भारत की अवसंरचना वित्तपोषण रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो वैश्विक दीर्घकालिक पूंजी को देश के सड़क नेटवर्क विकास से जोड़ने की कोशिश करता है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-11 16:14:07