ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के वरिष्ठ राजनयिक हुसैन हसन मिर्जा ने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एक साक्षात्कार में मिर्जा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की क्षेत्र में विश्वसनीयता और दोनों देशों के साथ भारत के संबंध ऐसे हैं कि एक फोन कॉल भी संवाद की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी इजरायल और ईरान के नेतृत्व से बात करें तो इससे मौजूदा संकट को समाप्त करने में मदद मिल सकती है। मिर्जा के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी को खाड़ी क्षेत्र के नेताओं के साथ-साथ वहां की जनता और व्यापारिक समुदाय में भी सम्मान प्राप्त है, और यही विश्वसनीयता उन्हें संभावित मध्यस्थ के रूप में प्रभावी बना सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यूएई मौजूदा संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल नहीं होना चाहता और वह नहीं चाहता कि उसकी भूमि का उपयोग किसी भी पक्ष द्वारा सैन्य कार्रवाई के लिए किया जाए। यूएई की भौगोलिक और कूटनीतिक स्थिति को देखते हुए वह एक ओर ईरान का पड़ोसी है, वहीं दूसरी ओर 2020 में हुए अब्राहम समझौतों के बाद इजरायल के साथ भी उसके औपचारिक संबंध हैं। मिर्जा ने कहा कि इस संतुलन के कारण यूएई संवाद और मध्यस्थता की भूमिका निभाने की स्थिति में है। उन्होंने क्षेत्र में बढ़ते सैन्य टकराव को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संघर्ष को आगे बढ़ाने के बजाय संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशना आवश्यक है। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा है और कई देशों ने स्थिति को लेकर चिंता जताई है। इसी संदर्भ में मिर्जा ने भारत की कूटनीतिक भूमिका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पहल से तनाव कम करने की संभावना बन सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-03-10 13:21:01