वांग यी बोले- भारत-चीन साझेदार हों न कि प्रतिद्वंद्वी

वांग यी बोले- भारत-चीन साझेदार हों न कि प्रतिद्वंद्वी

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को एक दूसरे को साझेदार के रूप में देखना चाहिए न कि प्रतिद्वंद्वी के रूप में, तथा अवसर के रूप में न कि खतरे के रूप में। चीन के राष्ट्रीय जन कांग्रेस (एनपीसी) के सत्र के इतर आयोजित वार्षिक प्रेस वार्ता में वांग ने भारत-चीन संबंधों में सुधार पर संतोष जताया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2024 कज़ान तथा अगस्त 2025 तियानजिन बैठकों ने संबंधों को नई दिशा दी। दोनों देश नेताओं के समझौतों को ईमानदारी से लागू कर रहे हैं। सभी स्तरों पर संपर्क बढ़े हैं, द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है तथा जन-जन संपर्क मजबूत हुए हैं। वांग ने कहा कि पड़ोसी देश होने के नाते तथा ग्लोबल साउथ के सदस्य के रूप में दोनों सभ्यताओं के गहरे बंधन और व्यापक हित साझा करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आपसी अविश्वास और टकराव एशिया के पुनरुत्थान को नुकसान पहुंचाएगा जबकि सहयोग दोनों देशों के विकास में सहायक होगा। वांग ने तीन प्रमुख बिंदु सुझाए- पहला, एक दूसरे को साझेदार मानना; दूसरा, सीमा क्षेत्रों में शांति स्थापित करना तथा तीसरा, विकास पर ध्यान केंद्रित करना जो दोनों का सबसे बड़ा साझा हित है। उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों के आयोजन में एक दूसरे का समर्थन करने का आह्वान किया। वांग ने कहा कि दोनों देशों को बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त होकर नेताओं के दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। लद्दाख में डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा सीमा पर तनाव कम हुआ है। व्यापार मात्र 5 वर्षों में 135 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। दोनों देश जलवायु परिवर्तन, डब्ल्यूटीओ सुधार और वैश्विक शासन पर एकजुट हैं। यह बयान भारत-चीन संबंधों में स्थिरता का संकेत देता है। 

by Dainikshamtak on | 2026-03-09 15:14:06

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