एप्पल ने घोषणा की है कि अब उसके कुल आईफोन उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत भारत में किया जा रहा है। कंपनी के अनुसार यह बदलाव उसके वैश्विक विनिर्माण नेटवर्क के पुनर्संतुलन और चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में एप्पल ने भारत में अपने उत्पादन आधार को तेजी से विस्तार दिया है और कई प्रमुख सप्लाई चेन साझेदारों के माध्यम से यहां आईफोन निर्माण शुरू किया है। भारत में आईफोन उत्पादन मुख्य रूप से तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में स्थित विनिर्माण इकाइयों में किया जा रहा है, जहां एप्पल के साझेदार कंपनियां बड़े पैमाने पर असेंबली और उत्पादन गतिविधियां संचालित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में उत्पादन बढ़ाने का निर्णय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने और उत्पादन जोखिम को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। एप्पल ने हाल के वर्षों में भारत में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें स्थानीय विनिर्माण बढ़ाना, आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार करना और भारतीय बाजार में अपनी खुदरा उपस्थिति को बढ़ाना शामिल है। भारत सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) जैसी नीतियों को भी इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसके तहत वैश्विक तकनीकी कंपनियों को भारत में उत्पादन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन दिया गया है। एप्पल के लिए भारत न केवल एक उभरता हुआ उपभोक्ता बाजार है बल्कि वैश्विक उत्पादन नेटवर्क का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने भारत में कई नए मॉडल के आईफोन का स्थानीय उत्पादन शुरू किया है, जिससे निर्यात गतिविधियां भी बढ़ी हैं। उद्योग से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि भारत में आईफोन उत्पादन का 25 प्रतिशत तक पहुंचना देश के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है। इससे रोजगार के अवसर, निर्यात क्षमता और तकनीकी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। एप्पल का यह कदम वैश्विक तकनीकी कंपनियों के उस व्यापक रुझान को भी दर्शाता है, जिसमें वे अपनी आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने और अलग-अलग देशों में उत्पादन क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रही हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-03-10 13:16:28