भारत ने वर्ष 2025 में प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की है, जिसका मुख्य कारण बिजली उत्पादन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण में कमी बताया गया है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उपलब्ध आकलनों के अनुसार बिजली उत्पादन में बदलाव, स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते उपयोग और उत्सर्जन कम करने वाली नीतियों के प्रभाव से यह गिरावट दर्ज की गई। भारत की बिजली उत्पादन प्रणाली में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है, जिससे पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को आंशिक रूप से कम करने में मदद मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में कमी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के समग्र स्तर को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में से एक होती है, क्योंकि यह क्षेत्र ऊर्जा उपयोग का बड़ा हिस्सा कवर करता है। भारत सरकार ने हाल के वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने, ऊर्जा दक्षता सुधारने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम और नीतियां लागू की हैं। इनमें बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार, पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना और ऊर्जा दक्षता से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन में विविधता लाना और दीर्घकालिक रूप से पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विभिन्न देशों द्वारा उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य तय किए गए हैं और भारत ने भी स्वच्छ ऊर्जा विस्तार तथा कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता कम करने के लिए कई प्रतिबद्धताएं व्यक्त की हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव और नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी आने वाले वर्षों में उत्सर्जन के रुझान को प्रभावित कर सकती है। वर्ष 2025 में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारत द्वारा दर्ज की गई सबसे बड़ी गिरावट को ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलावों और बिजली उत्पादन में प्रदूषण कम होने से जोड़कर देखा जा रहा है। यह रुझान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ऊर्जा उत्पादन में स्वच्छ स्रोतों के बढ़ते उपयोग और उत्सर्जन कम करने के प्रयासों का प्रभाव दिखाई देने लगा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक स्तर पर उत्सर्जन में स्थायी कमी सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा संक्रमण की प्रक्रिया को निरंतर आगे बढ़ाना आवश्यक होगा।
by Dainikshamtak on | 2026-03-08 21:13:14