प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) ने पूरे देश में 18,000 से अधिक जन औषधि केंद्र स्थापित कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस पहल से आम नागरिकों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50-80 प्रतिशत सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हो रही हैं, जिससे कुल 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) के तहत संचालित इस योजना ने जून 2025 में 16,912 केंद्रों से बढ़कर मार्च 2026 तक तेजी से विस्तार किया। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 2,658 केंद्र हैं, उसके बाद केरल (1,528), कर्नाटक (1,425) और तमिलनाडु (1,432)। योजना के तहत 2,110 प्रकार की दवाएं और 315 सर्जिकल उत्पाद उपलब्ध हैं, जिन्हें 2026 तक 2,200 दवाओं और 320 उत्पादों तक बढ़ाया जाएगा। प्रत्येक केंद्र पर कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह जैसी प्रमुख चिकित्सीय श्रेणियों की दवाएं सस्ते दामों पर मिल रही हैं। सरकार ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केवल डब्ल्यूएचओ-जीएमपी प्रमाणित निर्माताओं से खरीद की और एनएबीएल लैब में हर बैच का परीक्षण किया। जन औषधि दिवस हर वर्ष 7 मार्च को मनाया जाता है। केंद्रीय अस्पतालों और सीजीएचएस वेलनेस सेंटरों में जेनेरिक नाम से प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य हैं। प्रिंट, टीवी, सोशल मीडिया, बसों और सिनेमा हॉल के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पीएमबीआई ने 25,000 केंद्रों का लक्ष्य मार्च 2027 तक रखा है। यह योजना ग्रामीण और शहरी गरीबों के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर रही है। फ्रैंचाइजी मॉडल के तहत व्यक्तिगत उद्यमी, एनजीओ, ट्रस्ट और कंपनियां ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। योजना ने आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च घटाया और स्वास्थ्य समानता को बढ़ावा दिया। पीएम मोदी की इस पहल ने करोड़ों परिवारों को लाभ पहुंचाया।
by Dainikshamtak on | 2026-03-09 15:11:33