ईरान में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत अयातोल्ला अली खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है। यह निर्णय ईरान की सर्वोच्च धार्मिक परिषद ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ द्वारा लिया गया, जो देश के सुप्रीम लीडर के चयन के लिए संवैधानिक रूप से जिम्मेदार निकाय है। मोजतबा खामेनेई ने 8 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से पद संभाला और वे ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर बने।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव और संघर्ष तेज है। उनके पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को तेहरान में एक हमले में मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई।
मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से ईरान की सत्ता संरचना में प्रभावशाली माना जाता रहा है, हालांकि वे पहले किसी बड़े आधिकारिक पद पर नहीं थे। विश्लेषकों के अनुसार उनके इस पद पर आने से ईरान में कड़ा और कट्टरपंथी राजनीतिक रुख जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। उनका संबंध ईरान की शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से भी निकट माना जाता है, जिसने उनके नेतृत्व को समर्थन दिया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान हुए हमलों में उनके परिवार को भी व्यक्तिगत क्षति पहुंची, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों की मृत्यु की खबरें सामने आई हैं।
ईरान की सशस्त्र सेनाओं के जनरल स्टाफ ने भी नए सर्वोच्च नेता के प्रति निष्ठा व्यक्त की है और कहा है कि उनके नेतृत्व में देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यदि किसी भी देश ने ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई की तो उसका जवाब दिया जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि इस नियुक्ति से ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में निरंतरता का संकेत मिलता है, लेकिन साथ ही यह भी चर्चा का विषय बना है कि इस्लामी गणराज्य में पहली बार सुप्रीम लीडर का पद पिता से पुत्र को मिला है, जिसे कुछ पर्यवेक्षक एक प्रकार के वंशानुगत संक्रमण के रूप में देख रहे हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-03-09 16:29:12